संपादक राहुल सिसोदिया:–
नीमच।छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर नीमच पुलिस और यातायात विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती हेमलता अग्रवाल और नगर पुलिस अधीक्षक किरण चौहान के निर्देशन में गुरुवार (18 जून) को यातायात थाना प्रभारी सूबेदार सोनू बड़गुर्जर और उनकी टीम ने ज्ञानोदय स्कूल में संचालित स्कूल बसों का औचक निरीक्षण किया।
जांच के दौरान कई बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई, जिस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस ने स्कूल संचालकों को नियमों का पालन करने के लिए 02 दिन का अल्टीमेटम (समय) दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत हुई जांच
यातायात पुलिस द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा , एम सी मेहता विरुद्ध यूनियन ऑफ इण्डिया' [WP (C) 13029/1985] मामले में जारी की गई गाइडलाइंस के तहत बसों की चेकिंग की गई। चेकिंग के दौरान बसों में फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर (गति नियंत्रक यंत्र), अग्निशमन यंत्र, जीपीएस सिस्टम, सीसीटीवी कैमरा, बसों का फिटनेस, इंश्योरेंस और चालकों के लाइसेंस की बारीकी से जांच की गई।
जिन वाहनों में कमियां मिलीं, उनके संचालकों को सख्त हिदायत देकर पाबंद किया गया है कि वे दो दिनों के भीतर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर लें।
इन 9 नियमों का पालन करना है अनिवार्य (सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन)
1.रंग और पहचान, स्कूल बस का रंग अनिवार्य रूप से पीला होना चाहिए। बस के आगे-पीछे बड़े अक्षरों में "SCHOOL BUS" और स्कूल का नाम व फोन नंबर लिखा होना जरूरी है।
2.गति नियंत्रण, बस में स्पीड गवर्नर लगा हो और अधिकतम गति 40 किमी/घंटा से अधिक न हो।
3.अनुभवी ड्राइवर, चालक के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम 5 वर्ष का अनुभव हो। उस पर कोई गंभीर आपराधिक या यातायात मामला न हो। वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
4.अटेंडेंट की तैनाती, बच्चों की मदद और सुरक्षा के लिए बस में एक प्रशिक्षित अटेंडेंट/हेल्पर होना अनिवार्य है।
5.सुरक्षा उपकरण,फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र (फायर एक्स्टिंग्विशर), इमरजेंसी डोर और खिड़कियों पर सुरक्षा जाली/ग्रिल होना आवश्यक है।
6.सुरक्षित दरवाजे, बस में बंद होने वाले स्वचालित या सुरक्षित दरवाजे हों। खुले दरवाजे के साथ बच्चों को ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
7.क्षमता और व्यवस्था, बच्चों के बैग रखने की अलग व्यवस्था हो। सीट क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता।
8.तकनीकी निगरानी, बसों में सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम होना अनिवार्य है।
9.वैध दस्तावेज, आरटीओ (RTO) द्वारा जारी वैध फिटनेस प्रमाण पत्र और कमर्शियल/स्कूल बस परमिट होना जरूरी है।
नियमों की अनदेखी पर होगी सीधी अदालती कार्रवाई
यातायात पुलिस ने जिले के समस्त स्कूल संचालकों और प्राचार्यों को स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि वे बच्चों को लाने-ले जाने के लिए उपयोग किए जा रहे सभी वाहनों में सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन सुनिश्चित करें। इसके बाद भी यदि किसी स्कूल वाहन में कमी पाई जाती है, तो मोटर व्हीकल एक्ट (MVA) के तहत सीधे चालानी कार्रवाई कर मामला न्यायालय में पेश किया जाएगा।
यातायात पुलिस की अपील,
"नीमच जिले के सभी नागरिकों से अपील है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को किसी भी परिस्थिति में वाहन न चलाने दें और यातायात नियमों का पालन करें। साथ ही, स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जारी गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें।"